बांग्लादेश में कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी की बढ़ी उलझन, नए लोगो को चुपचाप हटाया, जानें कैसे फंसा पाकिस्तान परस्त संगठन

Updated on 06-10-2025 12:34 PM
ढाका: जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश ने अपना नया लोगो जारी करने के तुरंत बाद इसे वापस ले लिया है। इसे पार्टी की अपनी छवि को नरम दिखाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। जमात के प्रमुख शफीकुर्रहमान के कार्यालय से नया लोगो हटा दिया है। शफीकुर्रहमान ने रविवार को बांग्लादेश में नवनियुक्त स्विस राजदूत रेटो रेंगली के साथ शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान जो तस्वीरें सामने आई, उनमें जमात का कोई नया या पुराना लोगो नहीं दिखा। शफीकुर्रहमान के दफ्तर में केवल संगठन का नाम बांग्ला, अंग्रेजी और अरबी में लिखा हुआ था। यह पाकिस्तान परस्त माने जाने वाले इस गुट की उलझन को दिखाता है।

न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के सहायक महासचिव एएचएम हमीदुर रहमान आजाद का कहना है कि किसी भी राजनीतिक दल का लोगो बदल सकता है। हमारा तराजू वाला लोगो अभी चर्चा के स्तर पर है, इसे कोई अंतिम रूप नहीं दिया गया है। ये लोगो प्रस्तावित है। इसे जल्दी ही अंतिम रूप दिया जाएगा।

जमात का ध्यान ताकत बढ़ाने पर

जमात के सूत्रों ने न्यूज18 को बताया कि जमात को अपना लोगो बदलने पर समर्थकों के विरोध का डर है। उनके नरम रुख को पश्चिमी शक्तियों की चापलूसी और इस्लामी मूल्यों से हटने के रूप में देखा जा सकता है। शेख हसीना सरकार गिरने के बाद जमात ने तेजी से अपनी ताकत बढ़ाई है। जमात को फरवरी, 2026 में होने वाल राष्ट्रीय चुनावों में किंगमेकर के रूप में उभरने की उम्मीद है। ऐसे में जमात हर कदम सोच समझकर उठा रही है।
कम से कम तीन यूरोपीय संघ के देशों की ओर से जमात को मुख्यधारा में लाने के लिए अपनी छवि में बदलाव करने के लिए कहा जा रहा है। इससे उसे भविष्य में आतंकवाद के वित्तपोषण की जांच से बचने में मदद मिलेगी। हालांकि इससे जमात को समर्थन में कमी आने का डर है। ऐसे में फिलहाल यह देखना बाकी है कि जमात आगे क्या कदम उठाती है

लोगो के पीछे की कहानी क्या है?

बांग्लादेश में जमात का इतिहास विवादों से भरा रहा है। साल 2013 में बांग्लादेश के सर्वोच्च न्यायालय ने इसे चुनावों लड़ने से बैन कर दिया था। 2024 में हसीना सरकार ने जमात को आधिकारिक रूप से गैरकानूनी घोषित कर दिया था। हालांकि यूनुस की अंतरिम सरकार में जमात को खुलकर अपनी गतिविधि करने का मौका मिला है।

जमात ने दशकों तक अपने लोगो में अरबी शब्द 'आकिमुद्दीन' लिखा है। इसका अर्थ इस्लाम की स्थापना से है। इससे जमात की छवि स्पष्ट रूप से इस्लामवादी और शरिया समर्थक की बनती है। ऐसे में कई मौकों पर जमात ने पहले भी अपने लोगो को बदलने की कोशिश की थी, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। अब जमात इस लोगो को बदलने की कोशिश में है।

अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 16 January 2026
इस्लामाबाद: भारत के साथ पिछले साल मई महीने के संघर्ष के बाद पाकिस्तानियों ने डोनाल्ड ट्रंप की जमकर तेल मालिश की। पाकिस्तान ने ट्रंप के मध्यस्थता के दावे को स्वीकार किया…
 16 January 2026
वॉशिंगटन: वेनेजुएला की विपक्ष की नेता मारिया कोरिना मचाडो ने कहा कि उन्होंने अपने नोबेल शांति पुरस्कार मेडल डोनाल्ड ट्रंप को पेश किया है। मचाडो ने अपने देश के भविष्य पर…
 16 January 2026
वॉशिंगटन/मॉस्को: ग्लोबल वार्मिंग ने आर्कटिक के बर्फ को पिघलाना क्या शुरू किया, ग्रीनलैंड को लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने नया जियो पॉलिटिकल आग लगा दी है। ग्रीनलैंड, दुनिया में जंग का नया…
 16 January 2026
तेहरान: अमेरिका के राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप और उनके सलाहकारों ने फिलहाल ईरान पर हमला नहीं करने का फैसला किया है। ईरान ने भी कहा है कि वह प्रदर्शनकारियों को फांसी नहीं…
 06 October 2025
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ने चेतावनी दी है कि अगर हमास जल्द ही शांति समझौते पर तैयार नहीं होता है तो भारी खूनखराबा हो सकता है। उन्होंने कहा कि अब समय बहुत कम…
 06 October 2025
ल्हासा: माउंट एवरेस्ट पर भीषण बर्फीले तूफान के बाद लगभग 1000 ट्रेकर्स तिब्बत की ढलान की तरफ फंस गए हैं। जमीन से लगभग 16000 फीट ऊपर स्थित शिविरों तक पहुंचने के…
 06 October 2025
तेल अवीव: गाजा के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शांति समझौते पर इजरायल और हमास ने सहमति दी है। इससे अक्टूबर, 2023 से चल रहे युद्ध के रुकने और…
 06 October 2025
रियाद: खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के सभी छह देशों में जल्दी ही एक ही वीजा से घूमा जा सकेगा। जीसीसी इस साल सिंगल एकीकृत पर्यटक वीजा की टेस्टिंग शुरू करने…
 06 October 2025
अबू धाबी: अफ्रीकी देश इस्वातिनी देश के राजा मस्वाती-III ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान खींचा हैं। अपनी अनोखी जीवनशैली के लिए मशहूर मस्वाती ने यूएई का दौरा किया…
Advt.